भगवद गीता अध्याय 2, श्लोक 39 – कर्मयोग का आरंभ: जब ज्ञान से आगे आता है कर्म।

भगवद गीता अध्याय 2 श्लोक 39 अर्थ हमें सिखाता है कि ज्ञान तब ही सार्थक है जब वह कर्म में परिवर्तित हो। गीता 2.39 का भावार्थ – कर्मयोग की शुरुआत कुरुक्षेत्र की रणभूमि पर अर्जुन खड़ा है — धनुष हाथ में, लेकिन मन भय से जकड़ा हुआ। उसकी आँखों में केवल युद्ध नहीं, बल्कि भीतर … Read more

Read More →

Seer-Mantra: आध्यात्मिकता, गीता, बौद्ध धर्म और आधुनिक जीवन के मंत्र

Seer-Mantra: आध्यात्मिकता, भगवद गीता, बौद्ध धर्म और आधुनिक जीवन के मंत्र कभी-कभी एक छोटा-सा सवाल हमारी पूरी ज़िन्दगी की दिशा बदल देता है। यही सवाल और उनके जवाब तलाशने का नाम है — Seer-Mantra। सुबह का अनुभव और आत्मचिंतन एक शांत सुबह, जब पक्षियों की चहचहाहट और ठंडी हवा मन को छूती है, तो भीतर … Read more

Read More →