समत्व का संदेश – गीता अध्याय 2 श्लोक 38 से जीवन का पाठ

भूमिका: युद्ध, जीवन और हमारा आंतरिक रणभूमि कुरुक्षेत्र की उस सुबह की कल्पना कीजिए—जब अर्जुन रथ पर खड़ा है। सामने रिश्तेदारों, मित्रों और गुरुओं की विशाल सेना है। धनुष उसके हाथ में है, पर हाथ कांप रहे हैं। दिल धड़क रहा है और मन में संशय है। यही वह क्षण था जब महाभारत सिर्फ युद्ध … Read more

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